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‘होमबाऊंड’ : हिंदू भारत में चंदन वाल्मीकि (दलित) और शोएब मलिक (मुस्लिम) की नियति का आख्यान

फिल्म देखते समय आपको कुछ व्यक्तियों से नहीं, उस पूरी व्यवस्था से नफरत होती है, जो वर्ण-जाति-वर्ग या धार्मिक पहचान के आधार पर सोचती है और व्यवहार करती हैं तथा जहां किसी व्यक्ति की नियति उसकी वर्ण-जाति-वर्ग और धार्मिक पहचान से निर्धारित होती है। पढ़ें, डॉ. सिद्धार्थ रामू की यह फिल्म समीक्षा

सामाजिक न्याय की कब्रगाह और कारपोरेट लूट का केंद्र बनने की राह पर बिहार
नीतीश कुमार के 27 सदस्यीय नए मंत्रिमंडल में ऊंची जाति हिंदू 8, अतिपिछड़े हिंदू 5, पिछड़े हिंदू 8, दलित 5 और एक मुसलमान हैं।...
बिहार चुनाव जीत कर भी हार गए नीतीश कुमार
शपथ समारोह में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उप-मुख्यमंत्रियों, छोटे-बड़े नेताओं के भारी जुटान के बीच नीतीश तो अलग-थलग पड़े थे। प्रधानमंत्री...
युवा पीढ़ी को बाबा साहब के विचारों से दूर क्यों किया जा रहा है?
संविधान सभा की चर्चाओं में‌ आप देखेंगें कि संविधान के प्रारूप, इसके प्रावधानों और मूल्यों को कौन डिफेंड कर रहा है? वे थे डॉ....
बिहार : अब जगदेव फॉर्मूला की जरूरत
जब कहा गया कि दस का शासन नब्बे पर नहीं चलेगा तो इस पर पिछड़े वर्ग के राजनेताओं द्वारा अमल किया जाना चाहिए था।...
बिहार की अठारहवीं विधानसभा की सामाजिक बुनावट
सभी जातियों में राजपूतों का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा है। पिछड़े वर्गों में कुशवाहों और उनके बाद यादवों की संख्या सबसे अधिक है। अति पिछड़े...
‘होमबाऊंड’ : हिंदू भारत में चंदन वाल्मीकि (दलित) और शोएब मलिक (मुस्लिम) की नियति का आख्यान
फिल्म देखते समय आपको कुछ व्यक्तियों से नहीं, उस पूरी व्यवस्था से नफरत होती है, जो वर्ण-जाति-वर्ग या धार्मिक पहचान के आधार पर सोचती...
दलित-बहुजन समाज में विष्णु की स्थापना के मायने
मिथक, सत्ता और समाज के संबंधों को परिभाषित और स्थापित करते हैं। इस दृष्टिकोण से विचार करें तो दलित बहुजन समाज में विष्णु पूजा...
दुनिया लेखकों से चलती है (भाग 3)
एक सफल लेखक जो लिखता है, समाज उसे सच मानता है, लेकिन मिथकीय तौर पर यदि जीते-जागते मनुष्य को ही अमानवीय ऊर्जा और लोक-शत्रु...
सवाल मछुआरा महिलाओं की भागीदारी का
जब तक हम जाति-आधारित उत्पादन व्यवस्था और जेंडर के सवाल को एक-दूसरे से जोड़ कर विश्लेषण नहीं करेंगे तब तक जाति, लिंग भाव और...
आदिवासियों की शहादत और अकीदत की नगरी रांची में चौदह दिन
सरकार ने जेल को बिरसा मुंडा संग्रहालय और मेमोरियल पार्क में तब्दील कर दिया है। अंदर दाखिल होने के लिए पचास रुपए का टिकट...
अशराफ़िया अदब को चुनौती देती ‘तश्तरी’ : पसमांदा यथार्थ की कहानियां
तश्तरी, जो आमतौर पर मुस्लिम घरों में मेहमानों को चाय-नाश्ता पेश करने, यानी इज़्ज़त और मेहमान-नवाज़ी का प्रतीक मानी जाती है, वही तश्तरी जब...
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दलित साहित्य
दलित साहित्य के सौंदर्यशास्त्र का विकास दलित समाज, उसकी चेतना, संस्कृति और विचारधारा पर निर्भर करता है, जो एक लंबी प्रक्रिया में होते हुए...
बानू मुश्ताक की कहानियों में विद्रोही महिलाएं
सभी मुस्लिम महिलाओं को लाचार और बतौर वस्तु देखी जाने वाली बताने की बजाय, लेखिका हमारा परिचय ऐसी महिला किरदारों से कराती हैं जो...
योनि और सत्ता पर संवाद करतीं कविताएं
पितृसत्ता की जड़ें समाज के हर वर्ग में अत्यंत गहरी हो चुकी हैं। फिर चाहे वह प्रगतिशीलता के आवरण में लिपटा तथाकथित प्रगतिशील सभ्य...
रोज केरकेट्टा का साहित्य और उनका जीवन
स्वभाव से मृदु भाषी रहीं डॉ. रोज केरकेट्टा ने सरलता से अपने लेखन और संवाद में खड़ी बोली हिंदी को थोड़ा झुका दिया था।...
सन् 1938 का महिला सम्मलेन, जिसमें रामासामी को स्त्रियों ने दी ‘पेरियार’ की उपाधि
महिलाएं केवल पेरियार की प्रशंसक नहीं थीं। वे सामाजिक मुक्ति के उनके आंदोलन में शामिल थीं, उसमें भागीदार थीं। उनके नेतृत्व में सम्मलेन का...
लो बीर सेन्द्रा : जयपाल सिंह मुंडा के बहुआयामी व्यक्तित्व के नए पहलुओं से पहचान कराती पुस्तक
हाल में पुनर्प्रकाशित अपने संस्मरण में जयपाल सिंह मुंडा लिखते हैं कि उन्होंने उड़ीसा के गोरूमासाहिनी एवं बदमपहर में टाटा समूह द्वारा संचालित लौह...
गिरते स्वास्थ्य के बावजूद नागपुर और चंद्रपुर के बाद बंबई में दीक्षा कार्यक्रम में भाग लेना चाहते थे बाबा साहब
बाबा साहब आंबेडकर ने अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगा कर किताबें क्यों लिखीं? उन्होंने ऐसे अनेक कार्यक्रमों में भाग क्यों लिया जिनमें बड़ी...
वायकोम सत्याग्रह : सामाजिक अधिकारों के लिए पेरियार का निर्णायक संघर्ष
गांधी, पेरियार को भी वायकोम सत्याग्रह से दूर रखना चाहते थे। कांग्रेस गांधी के प्रभाव में थी, किंतु पेरियार का निर्णय अटल था। वे...
बी.पी. मंडल का ऐतिहासिक संबोधन– “कोसी नदी बिहार की धरती पर स्वर्ग उतार सकती है”
औपनिवेशिक बिहार प्रांत में बाढ़ के संदर्भ में कई परामर्श कमिटियां गठित हुईं। बाढ़ सम्मलेन भी हुए। लेकिन सभी कमिटियों के गठन, सम्मलेन और...