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पसमांदा को नुमाइंदगी देने की नहीं, सरकार की मंशा जमीन हड़पने की है : अली अनवर

वक्फ करना धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे कोई गैर-इस्लामी कैसे संचालित करेगा? मैं कहता हूं कि क्या आप किसी हिंदू धर्म के ट्रस्टों में इस तरह का प्रावधान कर सकते हैं कि उसकी समिति में गैर-हिंदू शामिल हों? पढ़ें, पूर्व राज्यसभा सदस्य व ऑल इंडिया पसमांदा महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अली अनवर का...

पसमांदा को नुमाइंदगी देने की नहीं, सरकार की मंशा जमीन हड़पने की है : अली अनवर
वक्फ करना धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे कोई गैर-इस्लामी कैसे संचालित करेगा? मैं कहता हूं कि क्या आप किसी हिंदू धर्म के ट्रस्टों...
बोधगया मंदिर में हिंदुओं के वर्चस्व के खिलाफ बढ़ता जा रहा बौद्ध धर्मावलंबियों का आंदोलन
आंदोलन का नेतृत्व करने वाले ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम एंड ऑल बुद्धिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय महासचिव आकाश लामा ने बताया कि गया जिला के...
‘इन गलियों में’ : संप्रदायवादी सवालों से टकराती फिल्म में दिखा उच्च जातीय अंतर्द्वंद्व
फिल्मकार अविनाश दास ने एक साथ कई सवालों पर निशाना साधा है। मसलन, वह जाति-प्रथा पर भी चोट करते दिखाई देते हैं। यह ऐसे...
यह चर्चा क्यों नहीं होती कि डॉ. आंबेडकर प्रथम प्रधानमंत्री होते तो क्या होता?
किसी नेता ने यह कहने की हिम्मत नहीं की कि आजादी के बाद अगर डॉ. आंबेडकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री होते तो देश के...
यात्रा संस्मरण : ‘सड़सी-कुटासी’ परब मनाते छोटानागपुर के असुर
होलिका दहन के मौके पर जहां एक ओर हिंदू एक स्त्री की प्रतिमा को जलाते हैं दूसरी ओर उसी दिन छोटानागपुर के असुर ‘सड़सी-कुटासी’...
सवर्ण व्यामोह में फंसा वाम इतिहास बोध
जाति के प्रश्न को नहीं स्वीकारने के कारण उत्पीड़ितों की पहचान और उनके संघर्षों की उपेक्षा होती है, इतिहास को देखने से लेकर वर्तमान...
त्यौहारों को लेकर असमंजस में क्यों रहते हैं नवबौद्ध?
नवबौद्धों में असमंजस की एक वजह यह भी है कि बौद्ध धर्मावलंबी होने के बावजूद वे जातियों और उपजातियों में बंटे हैं। एक वजह...
संवाद : इस्लाम, आदिवासियत व हिंदुत्व
आदिवासी इलाकों में भी, जो लोग अपनी ज़मीन और संसाधनों की रक्षा के लिए लड़ते हैं, उन्हें आतंकवाद विरोधी क़ानूनों के तहत गिरफ्तार किया...
ब्राह्मण-ग्रंथों का अंत्यपरीक्षण (संदर्भ : श्रमणत्व और संन्यास, अंतिम भाग)
तिकड़ी में शामिल करने के बावजूद शिव को देवलोक में नहीं बसाया गया। वैसे भी जब एक शूद्र गांव के भीतर नहीं बस सकता...
ब्राह्मणवादी वर्चस्ववाद के खिलाफ था तमिलनाडु में हिंदी विरोध
जस्टिस पार्टी और फिर पेरियार ने, वहां ब्राह्मणवाद की पूरी तरह घेरेबंदी कर दी थी। वस्तुत: राजभाषा और राष्ट्रवाद जैसे नारे तो महज ब्राह्मणवाद...
‘गाडा टोला’ : आदिवासी सौंदर्य बोध और प्रतिमान की कविताएं
कथित मुख्य धारा के सौंदर्य बोध के बरअक्स राही डूमरचीर आदिवासी सौंदर्य बोध के कवि हैं। वे अपनी कविताओं में आदिवासी समाज से जुड़े...
स्वतंत्र भारत में पिछड़ा वर्ग के संघर्ष को बयां करती आत्मकथा
ब्राह्मण या ऊंची जातियों के जैसे अपनी जाति को श्रेष्ठ बताने की अनावश्यक कोशिशों को छोड़ दें तो हरिनारायण ठाकुर की यह कृति स्वतंत्र...
दलित साहित्य में समालोचना विधा को बहुत आगे जाना चाहिए : बी.आर. विप्लवी
कोई कुछ भी लिख रहा है तो उसका नाम दलित साहित्य दे दे रहा है। हर साहित्य का एक पैरामीटर होता है। दलित साहित्य...
जब मैंने ठान लिया कि जहां अपमान मिले, वहां जाना ही नहीं है : बी.आर. विप्लवी
“किसी के यहां बच्चे की पैदाइश होती थी तो वहां नर्सिंग का काम हमारे घर की औरतें करती थीं। बच्चा पैदा कराना तथा जच्चा...
पेरियार पर केंद्रित एक अलग छाप छोड़नेवाली पुस्तक
यह किताब वस्तुनिष्ठ स्वरूप में पेरियार के जीवन दर्शन के वृहतर आयाम के कई अनछुए सवालों को दर्ज करती है। पढ़ें, अरुण नारायण की...
सावित्रीबाई फुले, जिन्होंने गढ़ा पति की परछाई से आगे बढ़कर अपना स्वतंत्र आकार
सावित्रीबाई फुले ने अपने पति जोतीराव फुले के समाज सुधार के काम में उनका पूरी तरह सहयोग देते हुए एक परछाईं की तरह पूरे...
रैदास: मध्यकालीन सामंती युग के आधुनिक क्रांतिकारी चिंतक
रैदास के आधुनिक क्रांतिकारी चिंतन-लेखन को वैश्विक और देश के फलक पर व्यापक स्वीकृति क्यों नहीं मिली? सच तो यह कि उनकी आधुनिक चिंतन...
जब नौजवान जगदेव प्रसाद ने जमींदार के हाथी को खदेड़ दिया
अंग्रेज किसानाें को तीनकठिया प्रथा के तहत एक बीघे यानी बीस कट्ठे में तीन कट्ठे में नील की खेती करने के लिए मजबूर करते...
डॉ. आंबेडकर : भारतीय उपमहाद्वीप के क्रांतिकारी कायांतरण के प्रस्तावक-प्रणेता
आंबेडकर के लिए बुद्ध धम्म भारतीय उपमहाद्वीप में सामाजिक लोकतंत्र कायम करने का एक सबसे बड़ा साधन था। वे बुद्ध धम्म को असमानतावादी, पितृसत्तावादी...
डॉ. आंबेडकर की विदेश यात्राओं से संबंधित अनदेखे दस्तावेज, जिनमें से कुछ आधारहीन दावों की पोल खोलते हैं
डॉ. आंबेडकर की ऐसी प्रभावी और प्रमाणिक जीवनी अब भी लिखी जानी बाकी है, जो केवल ठोस और सत्यापन-योग्य तथ्यों – न कि सुनी-सुनाई...