यूजीसी का नया रेगुलेशन तभी प्रभावी सिद्ध हो सकता है जब इसे सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों की जाति-वर्ग आधारित सत्ता संरचनाओं में हस्तक्षेप के रूप में रूपांतरित किया जाए। बता रहे हैं कुमार दिव्यम