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जंतर-मंतर महज स्थान नहीं, सामूहिक अभिव्यक्ति की आजादी की संस्था है

संसदीय लोकतंत्र में संसद से अभिव्यक्ति के अधिकार की गूंज को दूर करने के प्रयास सत्ता द्वारा निरंतर होते रहे हैं। अभी हाल तक प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में दिल्ली के एक फोटोग्राफर की तस्वीर लगी थी, जिसमें दिखता था कि आम प्रदर्शनकारी संसद परिसर के अंदर संसद सदस्यों के लिए लोकसभा और राज्यसभा...

जंतर-मंतर महज स्थान नहीं, सामूहिक अभिव्यक्ति की आजादी की संस्था है
संसदीय लोकतंत्र में संसद से अभिव्यक्ति के अधिकार की गूंज को दूर करने के प्रयास सत्ता द्वारा निरंतर होते रहे हैं। अभी हाल तक...
विपक्ष के ज्ञापन पर राष्ट्रपति के मौन रहने के मायने
राष्ट्रपति के अधिकारिक भाषण को तैयार करने की एक प्रक्रिया होती है और उसमें राष्ट्रपति का कार्यालय मुख्य रूप से शामिल होता है। लेकिन...
जातिगत जनगणना में ओबीसी कॉलम की मांग को लेकर दिसंबर में बड़े आंदोलन का ऐलान
बैठक में मांग की गई कि वर्ष 2027 की जनगणना में ओबीसी के लिए स्वतंत्र एवं पृथक कॉलम शामिल किया जाए, ताकि ओबीसी समाज...
संघर्ष के साथी का वियोग नहीं सह पाईं रूपी सोरेन
रूपी सोरेन अपनी सास सोनामणी और शिबू के बड़े भाई राजाराम की पत्नी के साथ मिलकर अपना घर संभालती और पुलिस की दबिश होती...
सबको दुखी कर गया राम बिलास भारती का अचानक चले जाना
बीते 26 सितंबर, 2026 को डॉ. राम बिलास भारती का हृदयगति रुकने के कारण दिल्ली में निधन हो गया। वे महज 52 वर्ष के...
आजीवक दर्शन : जिसकी पहचान भुला दी गई थी (पहला भाग)
लगभग सभी धर्म राजसत्ता से सांठ-गांठ कर, शक्ति-केंद्रों में बदलते चले गए। जैन तथा बौद्ध धर्म ने भी यही किया। आजीवक पिछड़ते गए। सच...
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, दूसरा भाग)
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, यह अजीब बात है कि भारत में व्यापारी समुदाय को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए कोई गंभीर...
सावित्रीबाई फुले : भारत में अंग्रेजी शिक्षा की जननी
सावित्रीबाई का अंग्रेजी भाषा को मां का दर्जा देना एक बहुत बड़ा कदम था। उन्होंने यह तब किया जब वे पेशवाओं के ब्राह्मणवाद के...
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, पहला भाग)
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक, “मुग़ल बादशाहों ने कभी भी अपने सिक्कों की गुणवत्ता कम नहीं की। सिक्का ढालने की तकनीक में कमियों को ध्यान...
करम परब : जंगल, खेत और रिश्तों को जोड़ने वाला आदिवासी उत्सव
करम परब को केवल करम वृक्ष की पूजा या एक रात के नाच-गाने तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता है। यह उस समाज...
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह की साहित्यिक, भाषायिक व वैचारिक यात्रा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह की प्रकाशित कृतियां भाषा-विज्ञान, साहित्यालोचना, इतिहास-बोध, लोकसंस्कृति तथा बहुजन विमर्श के विविध आयामों को अपने आप में समेटी हुईं हैं।...
‘पीली छतरी वाली लड़की’ की जाति
अगर विश्वविद्यालय में दिखाई देने वाला जातिवाद आसमान से नहीं टपका है, बल्कि यह समाज में मौजूद जातिवाद का ही विस्तार है, तो फिर...
खड़ी बोली की कविता जगत को चुनौती देतीं राजेश पाल की कविताएं
कवि सवाल करता है कि ‘फिर चमारीखेड़ा के नाम में ऐसा क्या चुभ गया, जो लोगों को रास नहीं आता’। तथाकथित ऊंची जाति वालों...
आदिवासी स्त्रियों के साथ होने वाले शोषण की दास्तान
जसिंता केरकेट्टा की बीस कहानियों का संग्रह ‘औरत का घर’ इस विरोधाभास को बख़ूबी उजागर करता है कि एक ओर आदिवासी समाज ‘दिक्कू’ व्यवस्था...
दो महात्माओं की कहानी
इस पुस्तक का केंद्रीय संदेश यही है कि महात्मा की उपाधि से अधिक महत्वपूर्ण यह देखना है कि वह मनुष्य किसके पक्ष में खड़ा...
समाजवाद : लोहिया बनाम जगदेव प्रसाद
डॉ. लोहिया, पेरियार ई.वी. रामासामी और जगदेव प्रसाद – तीनों ने ही समाजवाद को भारतीय सामाजिक यथार्थ के अनुसार परिभाषित किया, लेकिन सांस्कृतिक और...
सामाजिक न्याय की राजनीति और जगदेव प्रसाद
जगदेव प्रसाद की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि जिन्हें व्यापक शोषित समाज की आवाज के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, उन्हें कई बार...
जगदेव प्रसाद ने कहा था– ब्राह्मणवादियों से सटकर नहीं, हटकर लड़ना होगा
जिन मांगों को लेकर 5 सितंबर, 1974 को अरवल जिला के कुर्था प्रखंड कार्यालय के समक्ष शोषित समाज दल के बैनर तले किए जा...
आंबेडकर की नजर में कृष्ण और उनकी गीता
आंबेडकर ने महाभारत और भगवत गीता में कृष्ण की अलग-अलग स्थिति पर चर्चा की है। उन्होंने प्रश्न किया है कि ऐसा क्यों है कि...
मेरी यादों में बी.पी. मंडल
मंडल साहब से उत्सुकतावश लोग बार-बार पूछ रहे थे कि मंडल आयोग की रिपोर्ट में क्या अनुशंसा की गई है। कुछ लोग ऐसा कह...