सन् 1930 के आरंभिक वर्षों तक संतराम बी.ए. एक ऐसे समाज सुधारक के तौर पर हमारे सामने प्रस्तुत होते हैं, जो हिंदू धर्म के दायरे में रहकर ही अस्पृश्यता की समस्या का समाधान खोज रहे थे। इसके बावजूद वर्ण-व्यवस्था और जाति के विनाश वाला उनका विचार उन्हें बहुजन चेतना के दायरे में लाकर खड़ा...