फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों की नुमाइंदगी करते हुए ब्राह्मणवादी अवधारणा और उसकी निर्मितियों को चुनौती पेश की थी। भारतीय नवजागरण के जनक्षेत्र में सच्चे अर्थों में उनका विचार और साहित्य पुनर्जागरण की केंद्रीय धुरी था। बता रहे हैं डॉ. सुरेश...