रौदास गौतम अपनी आंखों से नहीं देख पाते, लेकिन यह उनके काम में बाधक नहीं है। पूछने पर बताते हैं कि मान्यवर कांशीराम की प्रेरणा से वे 1984 से मिशन के काम में जुटे और तब से लेकर आज तक दलित-बहुजनों के बीच चेतना फैलाने के लिए समर्पित हैं। पढ़ें, यह संक्षिप्त साक्षात्कार