बात समझने की यह है कि मान लीजिए कि निशा भगत मिशनरियों के खिलाफ या फिर धर्मांतरण के खिलाफ मुहिम संघ या भाजपा के निर्देश पर नहीं चला रही थीं, लेकिन काम तो वही कर रही थीं जो संघ और भाजपा का काम है। रही जमीन माफिया की बात तो जमीन माफिया है कौन?...