जिस भाजपा को खुद यकीन नहीं कि वह चार विधायकों को जुटा सकेगी, उसने नाथवानी नामक रेस के घोड़े पर दांव लगा दिया है, क्योंकि उसे यकीन है कि नाथवानी कुछ विधायकों की ‘अंतरआत्मा की आवाज’ को जगा कर समर्थन जुटा लेंगे। पढ़ें, विनोद कुमार का यह विश्लेषण
अगर डांगावास (14 मई, 2015, राजस्थान), खैरलांजी (27 सितंबर, 2006, महाराष्ट्र) और लक्ष्मणपुर बाथे (1 दिसंबर, 1997) जैसे नरसंहार और प्रताड़नाएं दलित साहित्य का...