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प्रगतिशीलों के बीच वीरेंद्र यादव के होने का निहितार्थ

वीरेंद्र यादव का सीना ‘अपनों’ के हाथों होते रहे ऐसे अपमानों से छलनी था। वे अपना ज़ख़्मी दिल लिए सेकुलर-प्रगतिशील विचारों की लड़ाई लड़ते रहे। वे अपने सुविधा-कक्ष में बैठकर ख़ामोशी से साहित्य रचते हुए करियर में डूब सकते थे। लेकिन, वे सोशल मीडिया से लेकर, पत्र-पत्रिकाओं तक और सड़कों तक मुसलसल फ़ासीवाद से...

महाराष्ट्र : मोबाइल नेटवर्क की कमी से जूझ रहे नंदुरबार जिले के आदिवासी बहुल गांवों के लोग
रोचमाड़ गांव के ही विठ्ठल पावरा 55 वर्ष के हैं। वे मजदूरी के जरिए जीविकोपार्जन करते हैं। वे कहते हैं कि “पहले गांव में...
यूजीसी रेगुलेशन : सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, लेकिन सवाल जस के तस
केवल ‘भेदभाव’ की परिधि में ओबीसी को शामिल करने भर से जब ऊंची जातियों के लोग पूरा आसमान सिर पर उठाकर बवाल काट रहे...
यूजीसी रेगुलेशन : सवर्णों के विरोध के मूल में ओबीसी को दिया गया अधिकार व संरक्षण
यूजीसी का नया रेगुलेशन तभी प्रभावी सिद्ध हो सकता है जब इसे सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों की जाति-वर्ग आधारित सत्ता संरचनाओं में...
वीरेंद्र यादव : हिंदी में परिवर्तनकामी आलोचना के एक युग का अवसान
वीरेंद्र यादव का लेखन विपुल और बहुआयामी था। वे प्रगतिशील आंदोलन की उपज थे, लेकिन बहुजन लोकेशन से आने के कारण उन्होंने जातीय और...
नफरत भरे भाषण : लोकतंत्र और सामाजिक एकता के लिए बढ़ता खतरा
कुल दर्ज घटनाओं में से 98 प्रतिशत भाषण मुसलमानों के खिलाफ थे। इनमें 1,156 मामलों में मुसलमानों को सीधे तौर पर और 133 मामलों...
सुदर्शन ऋषि और डुमार (डोमार) समाज
पूरे भारत में डोमार जाति की जनसंख्या को लेकर एकमत नहीं है, क्योंकि जनगणना में भी उनकी जानकारी सही नहीं मिल पाती है। इसका...
देखें, जगत के प्रकाश को
इस क्रिसमस पर हम झिलमिलाते बल्बों और साज-सज्जा से आगे देखें – हमारे जगत के उस प्रकाश को देखें, जो अंधेरे से भरी हमारी...
आर्यभट नहीं, आजीवक थे भारतीय गणित के प्रतिपादक
सच तो यह है कि सभ्यता के आरंभिक चरण में प्रकृति के सान्निध्य में रहकर, उसका करीब से अध्ययन करने वाले श्रमण, ज्ञान और...
हाशिए पर जीवन जीते गाड़िया लुहार
गाड़िया लुहारों का रहन-सहन भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है। सार्वजनिक शौचालयों का अभाव या उनसे दूरी, इन्हें खुले में शौच...
गुरु तेग बहादुर के हिंदू राष्ट्र के रक्षक होने का मिथक
‘हिंद दि चादर’ – यह वाक्यांश कब और कैसे अस्तित्व में आया? इसे किसने गढ़ा और सबसे पहले इसका उपयोग किस कृति में किया...
प्रगतिशीलों के बीच वीरेंद्र यादव के होने का निहितार्थ
वीरेंद्र यादव का सीना ‘अपनों’ के हाथों होते रहे ऐसे अपमानों से छलनी था। वे अपना ज़ख़्मी दिल लिए सेकुलर-प्रगतिशील विचारों की लड़ाई लड़ते...
कबीर की प्रासंगिकता पर सुभाषचंद्र कुशवाहा का संबोधन
जोगियों से गोरखनाथ और कबीर सीखते हैं कि प्रेम किस तरीक़े से मनुष्यता के लिए ज़रूरी है। किस तरह हिंदू-मुस्लिम विभाजन को दूर किया...
अशराफ़िया अदब को चुनौती देती ‘तश्तरी’ : पसमांदा यथार्थ की कहानियां
तश्तरी, जो आमतौर पर मुस्लिम घरों में मेहमानों को चाय-नाश्ता पेश करने, यानी इज़्ज़त और मेहमान-नवाज़ी का प्रतीक मानी जाती है, वही तश्तरी जब...
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दलित साहित्य
दलित साहित्य के सौंदर्यशास्त्र का विकास दलित समाज, उसकी चेतना, संस्कृति और विचारधारा पर निर्भर करता है, जो एक लंबी प्रक्रिया में होते हुए...
बानू मुश्ताक की कहानियों में विद्रोही महिलाएं
सभी मुस्लिम महिलाओं को लाचार और बतौर वस्तु देखी जाने वाली बताने की बजाय, लेखिका हमारा परिचय ऐसी महिला किरदारों से कराती हैं जो...
मनहीन, तनहीन और धनहीन के जननायक
कर्पूरी ठाकुर जिन वर्गों को ‘मनहीन, तनहीन और धनहीन’ कहकर संबोधित करते थे, शायद वे जानते थे कि इन वर्गों की पहली और सबसे...
शिवनंदन पासवान : एक जीवट समाजवादी, जिन्हें राजनीतिक कारणों से किया जा रहा विस्मृत
शिवनंदन पासवान ने जिस दौर में राजनीति में प्रवेश किया, वह बिहार और देश की राजनीति के लिए उथल-पुथल का समय था। समाजवादी आंदोलन...
जोतीराव फुले के सहयोगी सत्यशोधक तुकाराम तात्या पडवळ
तुकाराम तात्या पडवळ ने धर्म तथा जाति-आधारित शोषण को करीब से देखा था। धर्म के नाम पर पुजारी अनपढ़ लोगों को किस तरह से...
अपने दौर के वैज्ञानिकों से डॉ. आंबेडकर की मेल-मुलाकातें
मैंने जो भी थोड़ा बहुत शोधकार्य किया है, उससे मुझे कम-से-कम चार अग्रणी भारतीय वैज्ञानिकों से डॉ. बी.आर. आंबेडकर की मेल-मुलाकातों और उनके बीच...
वो आखिरी पल जब सूर्यास्त हुआ एक महानायक का
सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर जब रत्तु जी को लिये कार बाबा साहेब के घर में प्रविष्ट होती है तो श्रीमती सविता आंबेडकर...