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जातिगत जनगणना आज की ज़रूरत : डी.के. शिवकुमार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस देश को बनाने और इसके विकास में ओबीसी समुदाय का सबसे ज़्यादा योगदान रहा है। इसलिए ओबीसी के हितों की रक्षा के लिए जातिगत जनगणना आज की ज़रूरत है और यह सामाजिक न्याय के लिए ज़रूरी है। पढ़ें, यह खबर

जातिगत जनगणना आज की ज़रूरत : डी.के. शिवकुमार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस देश को बनाने और इसके विकास में ओबीसी समुदाय का सबसे ज़्यादा योगदान रहा है। इसलिए ओबीसी...
लीक से हटकर गोरखपुर में दलित इंटेलेक्चुएल फोरम की लोकतांत्रिक संगोष्ठी
संगोष्ठी में एक स्वर से यह सहमति थी कि आरक्षण किसी भी वर्ग या समुदाय की गरीबी को सीधे तौर दूर नहीं कर सकता...
अरजाल सहित सभी गैर-हिंदू दलितों के लिए काला दिवस है 10 अगस्त
समय की मांग है और सरकार का कर्तव्य बनता है कि वह मुस्लिम दलितों (अरजाल) के साथ इंसाफ करे। उन्हें मुख्यधारा में लाने के...
राजस्थान : डांगावास दलित संहार मामले में ‘न्याय’ की हत्या
बीते 5 अगस्त, 2026 को मेड़ता की एससी/एसटी विशेष अदालत ने इस मामले के सभी 40 अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त...
सामूहिक निराशा से निकलने के लिए मुसलमानों को संवैधानिक उपचारों पर बात करनी होगी
डॉ. आंबेडकर बार-बार यह भी कह रहे थे कि भारत में बहुमत राजनीतिक नहीं, बल्कि सांप्रदायिक होगा और एक स्थायी सांप्रदायिक बहुमत हमेशा अल्पसंख्यकों...
मंडल कमीशन की सिफारिशें : वर्ण-जाति आधारित वर्चस्व-अधीनता के रिश्ते के खात्मे का प्रस्ताव
जो कोई व्यक्ति भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार समता, स्वतंत्रता, बंधुता आधारित भारत, सबके लिए हर स्तर पर न्याय प्रदान करने वाला भारत...
‘जाति के अंत के लिए बुद्ध, फुले और आंबेडकर तीनों आवश्यक’
‘शाहू महाराज ने महात्मा फुले के समग्र वैचारिक दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया था। यह तथ्य है। उन्होंने फुले के विचारों में से केवल...
सोहेल हाश्मी की किताब ‘पत्थरों का संगीत’ अर्थात इस्लामी वास्तुकला का मिथक
इस पुस्तक में सोहेल हाशमी ने मध्यकालीन दक्षिण एशियाई वास्तुकला या निर्माण-शिल्प के कुछ उन ख़ास तत्वों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया है,...
दक्ष प्रजापति कुम्हार समुदाय के आदर्श नहीं
पिछले कुछ दशकों में अनेक कथावाचकों, धार्मिक आयोजकों और कुछ संगठनों ने यह प्रचारित करना प्रारंभ किया कि वर्तमान प्रजापति (कुम्हार) समुदाय के पूर्वज...
पुस्तक समीक्षा : अशराफी आधिपत्य के बरक्स पसमांदा अस्मिता का घोषणापत्र
पसमांदा विमर्श के समकालीन परिदृश्य में यह पुस्तक महज एक सामान्य अकादमिक अध्ययन या आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि पसमांदा आंदोलन के ऐतिहासिक...
विज्ञान को समझने की पहली किताब ‘मिथकों से विज्ञान तक’
विज्ञान परिवर्तनवादी है। वह एक धारणा या एक मान्यता पर स्थिर नहीं है। गौहर रज़ा कहते हैं कि विज्ञान की शोध रुकती नहीं है,...
इस्लाम, जाति-प्रथा और प्रेमचंद
सांप्रदायिक लेखक और नेता प्रायः राजनीतिक इतिहास को अनावश्यक रूप से प्राथमिकता देते हैं, जबकि सामाजिक और आर्थिक इतिहास को नज़रअंदाज़ कर देते हैं,...
पुस्तक पुनर्पाठ : सुनो कहानी ‘मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’
महुआ माजी की यह कथा कोल्हान क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, और सरायकेला-खरसावां) के उन आदिवासी समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाती है,...
असुर समुदाय के अध्यात्म और जीवन-सौंदर्य को अभिव्यक्त करतीं सुषमा असुर की कविताएं
फौरी तौर पर तो यही लगता है कि सुषमा बुद्ध के मध्यमार्ग की बात कह रही हैं, लेकिन यह बात तब सत्य होती यदि...
सुरेंद्र स्निग्ध की कहानियों में समाज और विमर्श
इस संग्रह की तीसरी और अंतिम श्रेणी की कहानियां सामाजिक संघर्षों पर आकर ठहरती हैं। जो लेखक के लेखन का उत्स है। इन कहानियों...
इतिहास के पन्नों में डॉ. आंबेडकर की धर्मांतरण संबंधी विचार यात्रा
सवर्ण हिंदुओं को इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने की अपनी झिझक दिखाने में आंबेडकर ने जानबूझकर उन्हीं मुस्लिम और ईसाई विरोधी धारणाओं और अफ़वाहों...
स्वामी अछूतानंद ‘हरिहर’ का आदि-हिंदू आंदोलन और नवजागरणकालीन संपादकों का नजरिया
औपनिवेशिक भारत में जब स्वामी अछूतानंद ने पांच करोड़ अछूतों की हिंदू धर्म से अलग पहचान का दावा पेश किया तो हिंदी लेखक उनका...
फुले दंपति की विरासत और मौजूदा दौर में संघर्ष व चुनौतियां
आज अनेक अवसरों पर फुले दंपति के नाम और व्यक्तित्व का सम्मान किया जाता है, लेकिन उनके मनुस्मृति-विरोधी, जाति-विरोधी और ब्राह्मणवादी ज्ञान-सत्ता की आलोचना...
मंगू राम मुगोवालिया, आद धर्म आंदोलन और रविदास पंथ का उदय
यद्यपि पंजाब के अछूत समुदाय में पहले से ही गुरु रविदास (रैदास) के प्रति गहन श्रद्धा भाव था मगर आद धर्म आंदोलन ने अत्यंत...
जब दयानंद सरस्वती के विरोधियों के सामने खड़े हो गए फुले
विभिन्न लेखकों द्वारा दिए गए विवरणों से पता चलता है कि दयानंद के जुलूस की तैयारी कर रहे रानाडे जैसे सुधारवादी नेताओं ने जुलूस...