कवि सवाल करता है कि ‘फिर चमारीखेड़ा के नाम में ऐसा क्या चुभ गया, जो लोगों को रास नहीं आता’। तथाकथित ऊंची जाति वालों को यह नाम लगातार चुभता रहा, क्योंकि उन्हें अपने गांव का नाम चमारीखेड़ा बतलाना पड़ता था। यही पोस्टल एड्रेस लिखना पड़ता था। पढ़ें, डॉ. सिद्धार्थ रामू की यह समीक्षा