पति की मृत्यु और पुनर्विवाह न होने की स्थिति में मीरा का यह पक्ष अधिक मुखरता से अभिव्यक्त हुआ है। उन्हें कुछ भी मानने से पहले स्त्री माना जाना चाहिए, जिसकी अपनी इच्छाएं हैं, जिनकी पूर्ति उस सामंती समाज में असंभव हैं। पढ़ें, डॉ. सुरेश कुमार जिनागल का यह विमर्श