‘शाहू महाराज ने महात्मा फुले के समग्र वैचारिक दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया था। यह तथ्य है। उन्होंने फुले के विचारों में से केवल यह स्वीकार किया कि जाति-व्यवस्था अन्यायपूर्ण, शोषणकारी और समाज की प्रगति में बाधक है।’ पढ़ें, डॉ. भरत पाटणकर का यह संबोधन