शिवमूर्ति ने ‘तिरिया चरित्तर’ लिखी, ‘सिरी उपमा जोग’ लिखी। शिवमूर्ति ने गांव के यथार्थ को नंगा कर दिया। दूसरी ओर मध्यवर्गीय समाजों से आए लेखक अपनी ही कुंठाओं से पीड़ित और चिंतित थे। आप देखिए कि इनका दृष्टिकोण उन लोगों के प्रति कैसा था, जो इनकी दासता में लगा था। इसको मधुकर सिंह ने...