फुले, पेरियार और आंबेडकर के आंदोलन केवल पहचान के आंदोलन नहीं थे। उनके केंद्र में मनुष्य की गरिमा, बराबरी और अधिकार का प्रश्न था। लेकिन पहचान आधारित राजनीति की अपनी सीमाएं भी हैं। जब वह व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के एजेंडे से कट जाती है, तो कई बार केवल सत्ता में हिस्सेदारी तक...