डॉ. लोहिया, पेरियार ई.वी. रामासामी और जगदेव प्रसाद – तीनों ने ही समाजवाद को भारतीय सामाजिक यथार्थ के अनुसार परिभाषित किया, लेकिन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि अलग होने के कारण उनके समाजवाद का चरित्र मौलिक रूप से अलग हो गया। पढ़ें, सुबोध यादव का यह आलेख