अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (1989) के तहत दर्ज मामलों में हर दस में से औसतन सात आरोपी साफ बच निकलते हैं। यह चिंताजनक इसलिए है क्योंकि इस क़ानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों में प्रारंभिक जांच और विवेचना का फ्रेमवर्क काफी मज़बूत माना जाता है। बता रहे हैं सैयद ज़ैग़म मुर्तजा