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लोकायत केवल धर्म और ईश्वर का नकार नहीं, संपूर्ण जीवन-दर्शन था

गणतांत्रिक प्रणाली के अस्तित्व में आने से पहले, लोकायत देशज व्यवस्था का हिस्सा था। उसमें छोटे-छोटे आत्मनिर्भर और स्वायत्त गांव या गांवों के समूह शामिल थे, जो धर्म, धर्मसत्ता या राजसत्ता से नहीं, बल्कि लोकेच्छा से अनुशासित होते थे। इसे तय करने में ब्राह्मण या उनके धर्मों का कोई योगदान नहीं था। पढ़ें, ओमप्रकाश...

कागज़ बनाम आदिवासी : जीतू मुंडा प्रकरण का ऐतिहासिक अर्थ
जीतू मुंडा की यह घटना कोई बेचारगी भरी अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। आदिवासी पूर्वजों की वही ऐतिहासिक चेतावनी, जो हमें याद दिलाती...
भाजपा चाहती है कि मुसलमान, हिंदू पिछड़े और दलित नागरिक की तरह न सोचें
हिंदुत्ववादी राजनीति को मुसलमानों के मुसलमानों की तरह सोचने से कोई दिक्कत नहीं है। उसे दिक़्क़त बस मुसलमानों के नागरिक की तरह सोचने से...
‘बॉडी काउंट’ : लैंगिक असमानता के खिलाफ नए तेवर की शार्ट फिल्म
एक सवाल से अगर स्त्री के बॉडी काउंट एक से अधिक हुए तो उसके चरित्र पर धब्बा लग जाता है और वहीं पुरुष का...
रांची में स्टेन स्वामी की जयंती पर एसआईआर और परिसीमन का विरोध
अपने संबोधन में डॉ. परकला प्रभाकर ने कहा कि असम में जहां केवल स्पेशल रिवीजन (एसआर) हुआ, वहां सीमित स्तर पर नाम हटे, लेकिन...
शूद्र विद्रोह : हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतिविमर्श
स्वीकार करना होगा कि कांचा आइलैय्या शेपर्ड की पुस्तक ‘शूद्र विद्रोह : ताकि बन सके आत्मनिर्भर भारत’ बहुजन समाज के एक ऑर्गैनिक बौद्धिक का...
लोकायत केवल धर्म और ईश्वर का नकार नहीं, संपूर्ण जीवन-दर्शन था
गणतांत्रिक प्रणाली के अस्तित्व में आने से पहले, लोकायत देशज व्यवस्था का हिस्सा था। उसमें छोटे-छोटे आत्मनिर्भर और स्वायत्त गांव या गांवों के समूह...
पसमांदा विमर्श पर संवाद करती किताब
भारत में दलित आंदोलन ने लंबे समय तक मुख्य रूप से हिंदू दलितों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन मुस्लिम और ईसाई...
सरहुल पर्व : आदिवासी संस्कृति, प्रकृति पूजा और कृषि परंपरा का उत्सव
आज जब पूरी दुनिया ‘पेरिस समझौते’ और ‘कार्बन फुटप्रिंट’ जैसे तकनीकी शब्दों में उलझी है, सरहुल का दर्शन एक सरल लेकिन अचूक समाधान पेश...
ब्राह्मण नहीं, श्रमण थे आयुर्वेद के प्रतिपादक (पहला भाग)
श्रमणों की तरह, चिकित्सक भी ज्ञान के साधक थे। वे घूमते-फिरते, रोग का कारण तथा उसके लिए नई औषधि, उपचार और चिकित्सा ज्ञान प्राप्त...
मिस्र बनाम सिंधु : भाषा और ज्ञान का उद्गम, प्रवाह व अवरोध
भारत के संबंध में भाषा की खोज का सिलसिला भीमबेटका की पहाड़ियों तक ले जाता है। मध्य प्रदेश के विंध्यक्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित...
मैं भी चाहता हूं कि दलित साहित्य बहुजन साहित्य में परिणत हो : कंवल भारती
शिवमूर्ति ने ‘तिरिया चरित्तर’ लिखी, ‘सिरी उपमा जोग’ लिखी। शिवमूर्ति ने गांव के यथार्थ को नंगा कर दिया। दूसरी ओर मध्यवर्गीय समाजों से आए...
पमरिया : साझा संस्कृति का बोझ और पसमांदा पहचान का बहुजन विमर्श
डॉ. अयुब राईन द्वारा संपादित यह पुस्तक महज़ एक सांस्कृतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि अशराफियत और सामंतवाद के गठजोड़ के खिलाफ एक पसमांदा ‘चार्जशीट’ है।...
आंबेडकर मिशन के नायक बुद्ध शरण हंस का साहित्य कर्म
हंस जी किस्सागो नहीं थे, वह कल्पना भी उनमें नहीं थी, जिससे कथा-शिल्प का निर्माण होता है। उनकी कहानियां उसी तरह की हैं, जिस...
आदिवासी, इकोसिस्टम, पूंजीवाद और नीला कॉर्नफ्लावर
लेखक का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के प्रति सजगता जगाना प्रतीत होता है। आदिवासी जीवन का संघर्ष इस उपन्यास का बायप्रोडक्ट जान पड़ता है। चूंकि...
‘हेरि महां दरद दिवाणी म्हारा दरद न जाण्या कोय’
पति की मृत्यु और पुनर्विवाह न होने की स्थिति में मीरा का यह पक्ष अधिक मुखरता से अभिव्यक्त हुआ है। उन्हें कुछ भी मानने...
फुले की बौद्धिक विरासत, जो आज बहुजनों की सबसे बड़ी ताकत है
निधन के पहले 14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर के दीक्षा भूमि में बाबासाहब ने बौद्ध धर्म स्वीकार करते समय देश के बहुजनों को जो...
फुले का सामाजिक और आध्यात्मिक दर्शन
फुले के विचारों के अनुसार, निर्माता ने सभी मनुष्यों को कुछ समान और अपरिहार्य अधिकार दिए हैं। इसलिए सभी मनुष्य समान हैं और किसी...
एक कहानी भारतीय पुनर्जागरण के पितामह जोतीराव फुले की
फुले आधुनिक दर्शनशास्त्र के पिता समझे जाने वाले देकार्ते के समकक्ष माने जाते हैं। देकार्ते ने सभी मान्यताओं को तर्क की कसौटी पर कसा।...
सामाजिक न्याय और डॉ. आंबेडकर
डॉ. आंबेडकर ने ब्रिटिश सरकार से मांग की कि दलित वर्ग को समान नागरिकता दी जाए। समान नागरिक के सभी अधिकार दलितों को दिये...
मानना और अवमानना के दौर में फुले
फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों की नुमाइंदगी करते हुए ब्राह्मणवादी अवधारणा...