फौरी तौर पर तो यही लगता है कि सुषमा बुद्ध के मध्यमार्ग की बात कह रही हैं, लेकिन यह बात तब सत्य होती यदि प्रारंभ की दो पंक्तियां नहीं होतीं– ‘जहां जाओगी, वहीं जाएंगे’। यहां वह प्रकृति से संवाद कर रही हैं और कह रही हैं कि उन्हें बस प्रकृति के साथ जाना है,...