मृतक पांचाराम की पत्नी सोनकी देवी जिस गांव में बिना मुंह ढंके और बिना सिर झुकाए कभी नहीं चलीं, उसी गांव की तथाकथित ताकतवर और प्रभावशाली जाति ने उन्हें वैधव्य, गंभीर शारीरिक चोटें और कभी न उबर सकने वाला सदमा – सबकुछ दिया। उन्हें धुंधला दिखने लगा है। चश्मा लगाती हैं। इन सबके बावजूद...