बमनी की सुंदरा टेकाम करीब 50 वर्ष की होंगी। वह कहती हैं कि “हम सालों से जंगल के पास बसे हुए हैं। जंगल हमें घर बनाने की मिट्टी से लेकर खाने के लिए खाना तक देता है। जंगल छीनना वास्तव में हमारी निर्भरता को चोट पहुंचाना है।” पढ़ें, यह खबर
फुले उन्नीसवीं सदी के महानतम व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में तमाम बहसों और विमर्शों की नुमाइंदगी करते हुए ब्राह्मणवादी अवधारणा...