हमें यह भी याद रखना होगा कि कानून द्वारा उन्हें समान नागरिक का दर्जा दिए जाने से असम के चर इलाके की महिलाओं का सच्चा सशक्तिकरण नहीं होगा। यह तभी होगा जब समाज उन्हें बराबरी का दर्जा दे और उन्हें एक बराबर नागरिक के रूप में अपना जीवन जीने दे। पढ़ें, डॉ. अशरफुल इस्लाम...