गोलमेज़ सम्मेलनों के दौरान आंबेडकर को इंग्लैंड, अमरीका और कनाडा में कई स्थानों पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया। यह तत्समय के स्थानीय अख़बारों में छपी ख़बरों, विज्ञापनों एवं आंबेडकर के एक भाषण के लिप्यांतरण से जाहिर है, जिन्हें निखिल बागडे ने पुरालेखों को खंगाल कर खोज निकाला है