यह भी एक गंभीर तथ्य है कि 1857 के सिपाही विद्रोह को अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कह कर मुख्यधारा के इतिहासकार गौरवान्वित करते हैं, लेकिन जोतीराव फुले ने इसे ब्राह्मणवादी शासन को पुनः स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा और चिह्नित किया। पढ़ें, विनोद कुमार का...