जसिंता केरकेट्टा की बीस कहानियों का संग्रह ‘औरत का घर’ इस विरोधाभास को बख़ूबी उजागर करता है कि एक ओर आदिवासी समाज ‘दिक्कू’ व्यवस्था का शिकार रहा है, तो दूसरी ओर वह अपनी महिलाओं पर वर्चस्व बनाए रखने के लिए उच्च जाति की स्त्री-विरोधी व्यवस्थाओं को आत्मसात करने से गुरेज़ नहीं करता है, पढ़ें...