तात्यासाहेब ने अपने भाषण में और लेखन में हिंदू शब्द का ज्यादा इस्तेमाल नही किया। वे खुलकर जाति का नाम लेकर ही विश्लेषण करते हैं। उन्हें प्रबोधन के स्तर पर इस देश में जातीय ध्रुवीकरण चाहिए था, क्योंकि धार्मिक ध्रुवीकरण से ब्राह्मणी व्यवस्था मजबूत होती है, यह उन्होंने अच्छी तरह जान लिया था। पढ़ें,...